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साहित्य संहिता

Available at http://www.sahityasamhita.org/

ISSN 2454-2695

Volume 03 Issue 02

February 2017

Available online: https://edupediapublications.org/journals/index.php/SS/ P a g e | 243

जाते समय मुझे आवाज न देना

नाम -आरती

पिता - श्री कमम बीर

माता -श्रीमती सरोज शमाम

शशक्षा - एम० ए०,(NET)

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--------- जाते समय मुझे आवाज न देना --------

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जाते समय मुझे आवाज न देना ।

चलते कदमों को रोक न देना ।।

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ििचाननी िै मुझे वो मूरत ।

वो सूरत तुम बदल न देना ।।

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नजरो से अरमाने इकरार करना ।

तरसा कर िमें झुका न देना ।।

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ख़ता को िमारी नादानी समझना ।

रती को मुसाह़िर जैसे भुला न देना ।।

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------मुकद्दर को िमें आजमाना िै -------

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मुकद्दर को िमें आजमाना िै ।

जजन्दगी आज िमें कु छ िाना िै ।।

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िाथों में िाथ डाल तेरे संग चलना िै ।

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साहित्य संहिता

Available at http://www.sahityasamhita.org/

ISSN 2454-2695

Volume 03 Issue 02

February 2017

Available online: https://edupediapublications.org/journals/index.php/SS/ P a g e | 244

तेरे जरे-जरे को िमें मिकाना िै ।।

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मुड़ कर देख जजन्दगी िमें ।

तेरे पिछे निीं, आगे िमें चलना िै ।।

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--------धरती का िर कोना बदलाव चािेगा ---------

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धरती का िर कोना बदलाव चािेगा ।

िर दखु ी मन में, इक पवश्वास जगाएगा ।।

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चटकीले-मटकीले फू ल अब इतराएगे ।

फू लों से मोती चुन कर, चााँद भी शरमाएगा ।।

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धरती शून्यता से जाग उठी ।

िर वक्त अब मुस्काएगा ।।

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फू लों की वर्ाम करके ।

हफर पवरि से िमें सताएगा ।।

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सुद-बुद खोकर चंचल फू ल भी ।

बदलाव का पवश्वास जगाएगा ।।